परिचय
हमारे संस्थान, उसकी विशेषताओं और उद्देश्य के बारे में विस्तृत जानकारी।
भारतीय संस्कृति, परंपरा और वैदिक ज्ञान की अमूल्य धरोहर को संजोने व आगे बढ़ाने के लिए समर्पित प्रतिष्ठित शिक्षण संस्था।
स्वर्गीय शिवकेदार मिश्र जी की धर्मपत्नी श्रीमती भागीरथी मिश्राणी जी द्वारा 13 गांवों की संपत्तियों से 1963 ई. में इस महाविद्यालय की स्थापना की गई।
श्रीमती भागीरथी ट्रस्ट आदर्श संस्कृत महाविद्यालय भारतीय संस्कृति, परंपरा और वैदिक ज्ञान की अमूल्य धरोहर को संजोने व आगे बढ़ाने के लिए समर्पित एक प्रतिष्ठित शिक्षण संस्था है।
इस महाविद्यालय की स्थापना का उद्देश्य प्राचीन संस्कृत ज्ञान को आधुनिक शिक्षा पद्धति के साथ जोड़ते हुए छात्रों के बौद्धिक, नैतिक और आध्यात्मिक विकास को प्रोत्साहित करना है।
संस्थान का मूल मंत्र है — “विद्या ददाति विनयं”, अर्थात शिक्षा से विनम्रता उत्पन्न होती है।
इसी भाव से प्रेरित होकर महाविद्यालय संस्कृत भाषा, वेद, दर्शन, व्याकरण, साहित्य और भारतीय संस्कारों के अध्ययन-अध्यापन को आधुनिक दृष्टिकोण के साथ प्रस्तुत करता है।
संस्थान वाराणसी संस्कृत विश्वविद्यालय से मान्यता प्राप्त है और संस्कृत व भारतीय संस्कृति के पुनर्जागरण में अग्रणी है। यह महाविद्यालय केवल एक शिक्षण केंद्र नहीं, बल्कि भारतीय ज्ञान परंपरा के पुनर्जागरण का एक आंदोलन है — जहाँ संस्कृत केवल भाषा नहीं, बल्कि जीवन का दर्शन बन जाती है।
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